## चन्द्रमा (Moon)
       

चन्द्रमा  की सतह  और उसके आंतरिक स्थिति का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलॉजी कहलाता है इस पर धूल के मैदान को शांतिसागर कहते हैं यह चंद्रमा का पिछला भाग है जो अंधकारमय होता है चन्द्रमा का उच्चतम पर्वत लिबनिट्ज पर्वत है  जो 35000 फुट ऊंचा है यह चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर स्थित है। चन्द्रमा को जीवाश्म ग्रह भी कहा जाता है चन्द्रमा पृथ्वी की 1 परिक्रमा लगभग 27 दिन 8 घंटे में पूरी करता है और इतने ही समय में अपने अक्ष पर 1 घुन्नन करता है यही कारण है कि चन्द्रमा का सदैव 1 ही भाग  दिखाई पड़ता है पृथ्वी से चंद्रमा का 57•/. भाग को देख सकते हैं चंद्रमा का अक्ष तल पृथ्वी
के अक्ष के साथ 58. 48° का कौण बनता है। अपोलो अंतरिक्ष यात्रा द्वारा लाए गए चट्टानों से पता चला है कि चंद्रमा भी उतना ही पुराना है जितना पृथ्वी लगभग 46 करोड़ वर्ष इसकी चट्टानों में टाइटेनियम की मात्रा अत्यधिक मात्रा में पाई गई है


#क्षुद्रग्रह (Asteroids )

मंगल एवं बृहस्पति ग्रह की कक्षा के बीच कुछ छोटे छोटे आकाशीय पिंड है जो सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं उसे क्षुद्रग्रह कहते हैं खगोल शास्त्र के अनुसार ग्रहों के विस्फोट के फलस्वरूप टूटे टुकड़ों से क्षुद्रग्रह का निर्माण होता है।
सूर्य ग्रह जब पृथ्वी से टकराता है तो पृथ्वी के पृष्ठ पर विशाल गर्त बनता है महाराष्ट्र में लोनार झील ऐसा ही एक गर्त  हैं।
"फोर  वेस्टा" एकमात्र क्षुद्रग्रह है जिसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है


#धूमकेतु (Comet)

सौरमंडल के छोर पर बहुत ही छोटे छोटे अरबों पिंड विद्यमान है जो धूमकेतु या पुच्छल तारे कहलाते हैं यह गैस एवं धूल का संग्रह है जो आकाश में लम्बी चमकदार पुत्र सहित प्रकाश के चमकीले गोले के रूप में दिखाई देते हैं।
धूमकेतु केवल तभी दिखाई पड़ता है जब वह सूर्य की ओर अग्रसर होता है क्योंकि सूर्य किरणें इसकी गैस को चमकीला बना देती है धूमकेतु की पूंछ हमेशा सूर्य से दूर होता दिखाई देता है हैले नामक धूमकेतु का परिक्रमणकाल 76 वर्ष है यह अंतिम बार सन  1986 में दिखाई दिया था अगली बार यह 1986 +76=2062 में दिखाई देगा।
धूमकेतु हमेशा के लिए टिकाऊ नहीं होते हैं फिर भी प्रत्येक धूमकेतु के लौटने का समय निश्चित होता है


#उल्का (Meteors )

उल्काएं प्रकाश की चमकीली  घारी के रूप में दिखते हैं जो आकाश में क्षण भर के लिए दमकती है और लुप्त हो जाती है उल्काएं क्षुद्र  ग्रहों के टुकड़ों तथा धुमकेतूओं द्वारा पीछे छोड़े गए घुल के कण होते हैं